क्या रिश्तेदार आनेवाले हैं?
अरे यार ! ये रिश्तेदार आऐगें!
आकर जाते तो ठीक था!
पर नहीं , तौहफा कम..
निषंग में अनंत सवाल लेकर आते हैं।
आते ही इस निहत्ते पर वार करने लगते हैं।
सबसे पहले ही 'क्या करते हो बेटा आजकल' का ही तीर निकलता है,
बिन शर ,निषंग खडे मुझे ये तीर और चूबती है।
सवालों के तीर क्या कम होगें? ना जी ना,
इनके सवालों के तीर तब तक नही रुकते जब तक मेरा तन लहू से खाली नहीं होता।
मैं रणभूमी में भीष्म बनकर और रिश्तेदार अर्जुन बनकर खडे़ हैं।
मैं रिश्तेदारों के सवालों से खुश हूँ क्यूँ की वे मेरें प्रिय पार्थ ही तो हैं।
पहले इनको गले मिलता था अब इनके सवालों से।
-hrk
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